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दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र: अर्थ और लाभ

On: December 13, 2025 4:22 PM
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Shiv Daridrya Dahan Stotra Hindi
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Shiv Daridrya Dahan Stotra Hindi / दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र भगवान शिव को समर्पित एक बहुत शक्तिशाली स्तोत्र है। इसका नाम ही बताता है – “दारिद्र्य” यानी गरीबी और “दहन” यानी जलाना। मतलब, यह स्तोत्र गरीबी और दुखों को जलाकर भस्म कर देता है। यह स्तोत्र महर्षि वशिष्ठ जी द्वारा रचित है। इसका पाठ करने से आर्थिक तंगी, कर्ज, मानसिक दुख और जीवन की कई समस्याएं दूर हो जाती हैं।

यह स्तोत्र कुल 8 श्लोकों का है, और हर श्लोक के अंत में “दारिद्र्य दुःख दहनाय नमः शिवाय” आता है। नीचे मैं आपको पूरा स्तोत्र संस्कृत में दूंगा, उसके साथ सरल हिंदी अर्थ भी समझाऊंगा। अर्थ समझकर पढ़ने से ज्यादा लाभ मिलता है।

पूरा स्तोत्र हिंदी अर्थ सहित

अर्थ: जो पूरे विश्व के स्वामी हैं, जो नरक रूपी संसार सागर से पार कराने वाले हैं, जिनके नाम कान में सुनने से अमृत जैसा लगता है, जो माथे पर चंद्रमा धारण करते हैं, कर्पूर जैसे सफेद रंग वाले, जटाओं वाले और गरीबी के दुख जलाने वाले शिव को नमस्कार।

अर्थ: जो पार्वती जी के प्रिय हैं, जो चंद्रमा की कला धारण करते हैं, काल का अंत करने वाले, सांपों के राजा को कंकण (बाजूबंद) बनाए हुए, गंगा को सिर पर धारण करने वाले, गजराज (हाथी) को मारने वाले और दुख जलाने वाले शिव को नमस्कार।

अर्थ: जो भक्तों के प्रिय हैं, संसार के रोग और भय दूर करने वाले, उग्र रूप वाले, दुखों के सागर से पार कराने वाले, ज्योति स्वरूप, गुणों वाले नाम से नाचने वाले और दुख जलाने वाले शिव को नमस्कार।

अर्थ: जो चर्म (चमड़ा) का वस्त्र पहनते हैं, शव की भस्म लगाते हैं, माथे पर नेत्र वाले, मणि के कुंडल पहने हुए, पैरों में मंजीर (घुंघरू) वाले, जटाधारी और दुख जलाने वाले शिव को नमस्कार।

अर्थ: जो पांच मुख वाले हैं, सांपों के राजा को आभूषण बनाए हुए, सुनहरे वस्त्र पहने, तीनों लोकों से सुशोभित, आनंद देने वाले, वरदान देने वाले, अंधकारमय और दुख जलाने वाले शिव को नमस्कार।

अर्थ: जो सूर्य के प्रिय हैं, संसार सागर से पार कराने वाले, काल का अंत करने वाले, ब्रह्मा जी द्वारा पूजित, तीन नेत्र वाले, शुभ लक्षणों वाले और दुख जलाने वाले शिव को नमस्कार।

अर्थ: जो राम के प्रिय हैं, रघुनाथ को वरदान देने वाले, सांपों के प्रिय, नरक सागर से पार कराने वाले, पुण्यों से भरे, देवताओं द्वारा पूजित और दुख जलाने वाले शिव को नमस्कार।

अर्थ: जो मुक्तियों के स्वामी हैं, फल देने वाले, गणेश के स्वामी, गीत प्रिय, नंदी वाहन वाले, हाथी की खाल पहनने वाले, महेश्वर और दुख जलाने वाले शिव को नमस्कार।

    फलश्रुति (लाभ बताने वाला भाग): वसिष्ठेन कृतं स्तोत्रं सर्वरोग निवारणम्। सर्वसंपत्करं शीघ्रं पुत्रपौत्रादि वर्धनम्॥ त्रिसंध्यं यः पठेन्नित्यं स हि स्वर्गमवाप्नुयात्।

    अर्थ: वशिष्ठ जी द्वारा रचित यह स्तोत्र सभी रोगों को दूर करने वाला, शीघ्र सभी संपत्ति देने वाला, पुत्र-पौत्र बढ़ाने वाला है। जो रोज तीन संध्या (सुबह, दोपहर, शाम) पढ़ता है, वह स्वर्ग प्राप्त करता है।

    पाठ के लाभ (फायदे)

    यह स्तोत्र बहुत चमत्कारी है। इसके नियमित पाठ से मिलने वाले मुख्य फायदे:

    • आर्थिक समृद्धि: गरीबी, कर्ज, धन की तंगी दूर होती है। घर में स्थिर लक्ष्मी का वास होता है।
    • दुखों का नाश: मानसिक और शारीरिक दुख, तनाव, रोग दूर होते हैं।
    • व्यापार-नौकरी में सफलता: व्यापार में उन्नति, नौकरी में तरक्की मिलती है।
    • संतान सुख: पुत्र-पौत्र की प्राप्ति और वंश वृद्धि होती है।
    • सुख-शांति: परिवार में खुशहाली, मन शांत रहता है।
    • स्वर्ग प्राप्ति: नित्य पाठ से मोक्ष और स्वर्ग का लाभ।
    • खासकर सोमवार या प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल चढ़ाते हुए पढ़ें तो ज्यादा असरदार।

    श्रद्धा से रोज पढ़ें, शिव जी की कृपा जरूर मिलेगी। अगर आर्थिक समस्या है तो आज से ही शुरू करें। ॐ नमः शिवाय! Shiv Daridrya Dahan Stotra Hindi

    A. Kumar

    मेरा नाम अजीत कुमार है। मैं एक कंटेंट क्रिएटर और ब्लॉगर हूँ, जिसे लिखने और नई-नई जानकारियाँ शेयर करने का शौक है। इस वेबसाइट पर मैं आपको ताज़ा खबरें, मोटिवेशनल आर्टिकल्स, टेक्नोलॉजी, एजुकेशन, हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी उपयोगी जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराता हूँ।

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