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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 साल पूरे – इतिहास और उपलब्धियां

On: September 24, 2025 6:13 PM
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RSS Ke 100 Varsh
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RSS Ke 100 Varsh / राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 साल पूरे: जानिए संघ से जुड़ी हर जानकारी

भारत का सामाजिक और सांस्कृतिक परिदृश्य कई संस्थाओं और आंदोलनों से प्रभावित रहा है। इन्हीं संस्थाओं में से एक है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), जिसने 2025 में अपने 100 साल पूरे कर लिए हैं। 1925 में विजयादशमी के दिन डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर से जिस संगठन की नींव रखी थी, वह आज दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन माना जाता है।

आज जब संघ अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर चुका है, तो यह अवसर केवल संघ के स्वयंसेवकों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए ऐतिहासिक है। आइए विस्तार से जानते हैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना, विचारधारा, कार्यप्रणाली, विवाद, उपलब्धियां और 100 साल की यात्रा की कहानी।


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना कैसे हुई?

  • स्थापना वर्ष: 27 सितंबर 1925 (विजयादशमी)
  • स्थान: नागपुर, महाराष्ट्र
  • संस्थापक: डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार

पृष्ठभूमि

20वीं सदी की शुरुआत में भारत स्वतंत्रता आंदोलन के दौर से गुजर रहा था। देश गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा था और समाज जातिवाद, विभाजन, धार्मिक कट्टरता और आपसी मतभेदों से कमजोर हो रहा था। डॉ. हेडगेवार का मानना था कि भारत को केवल राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं चाहिए, बल्कि एक ऐसा सशक्त और संगठित समाज चाहिए जो सांस्कृतिक आधार पर खड़ा हो। इसी सोच से संघ का जन्म हुआ। RSS Ke 100 Varsh


RSS का उद्देश्य और विचारधारा

संघ का मुख्य उद्देश्य था – भारत को एक संगठित, सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाना।

प्रमुख विचारधारा

  1. हिंदू राष्ट्रवाद – संघ का मानना है कि भारत की आत्मा हिंदू संस्कृति में निहित है।
  2. चरित्र निर्माण – संघ व्यक्तिगत अनुशासन, नैतिकता और सेवा भावना पर बल देता है।
  3. संगठन शक्ति – समाज में बिखरे हुए वर्गों को जोड़ना और एक राष्ट्रीय पहचान देना।
  4. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद – राजनीति से परे जाकर भारतीय परंपरा, संस्कृति और मूल्यों को जीवित रखना।

संघ की कार्यप्रणाली: शाखा की परंपरा

RSS की सबसे बड़ी पहचान उसकी शाखाएं हैं।

  • शाखा वह जगह है, जहां स्वयंसेवक प्रतिदिन सुबह या शाम एकत्रित होते हैं।
  • यहां खेल, योग, व्यायाम, गीत, देशभक्ति के श्लोक और विचार चर्चा होती है।
  • शाखा अनुशासन, समयपालन और संगठन कौशल सिखाने का सबसे बड़ा माध्यम है।

शाखा का महत्व

कई लोग मजाक में कहते हैं – “RSS की असली यूनिवर्सिटी उसकी शाखा है।” क्योंकि यहीं से स्वयंसेवक जीवनभर के लिए संस्कार लेकर जाते हैं।


RSS की 100 साल की यात्रा: प्रमुख पड़ाव

1. प्रारंभिक दौर (1925-1947)

  • संघ ने धीरे-धीरे महाराष्ट्र और फिर पूरे देश में अपनी शाखाएं फैलाना शुरू किया।
  • 1942 में “भारत छोड़ो आंदोलन” के दौरान कुछ विवादों में फंसा, लेकिन स्वतंत्रता संग्राम में भी उसके कई स्वयंसेवकों ने भूमिका निभाई।
  • 1947 में स्वतंत्रता के बाद संघ तेजी से बढ़ा।

2. महात्मा गांधी की हत्या और संघ पर प्रतिबंध (1948)

  • 30 जनवरी 1948 को गांधी जी की हत्या के बाद संघ पर प्रतिबंध लगाया गया।
  • हालांकि संघ पर सीधा आरोप साबित नहीं हुआ और 1949 में प्रतिबंध हटा लिया गया।

3. जनसंघ और राजनीति (1951)

  • संघ से जुड़े श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जिसने आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का रूप लिया।

4. आपातकाल का दौर (1975-77)

  • इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल के समय संघ के स्वयंसेवक लोकतंत्र की रक्षा के लिए भूमिगत आंदोलन में सक्रिय रहे।

5. राम जन्मभूमि आंदोलन (1980-90)

  • अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन में संघ और उसकी शाखा विश्व हिंदू परिषद (VHP) की बड़ी भूमिका रही।
  • यही आंदोलन आगे चलकर भारतीय राजनीति को गहराई से प्रभावित कर गया।

6. वर्तमान दौर (2000-2025)

  • संघ आज केवल सामाजिक संगठन नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर सक्रिय सांस्कृतिक शक्ति बन चुका है।
  • 2024 तक संघ की शाखाएं 60,000 से अधिक हो चुकी हैं।
  • 2025 में संघ अपने शताब्दी वर्ष का भव्य आयोजन कर रहा है।

RSS से जुड़े संगठन (संघ परिवार)

RSS केवल शाखाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कई अनुषांगिक संगठन हैं जिन्हें मिलाकर “संघ परिवार” कहा जाता है।

प्रमुख संगठन

  1. भारतीय जनता पार्टी (BJP) – राजनीति में सक्रिय।
  2. विश्व हिंदू परिषद (VHP) – धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यों के लिए।
  3. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) – छात्र संगठन।
  4. भारतीय मजदूर संघ (BMS) – श्रमिक संगठन।
  5. वनवासी कल्याण आश्रम – आदिवासी क्षेत्रों में कार्यरत।
  6. सेवा भारती – सेवा और राहत कार्य।

इनके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास के लिए सैकड़ों संगठन सक्रिय हैं।


RSS पर लगे आरोप और विवाद

संघ का इतिहास विवादों से भी भरा रहा है।

प्रमुख आरोप

  • सांप्रदायिकता का आरोप – आलोचकों का मानना है कि संघ केवल हिंदू हितों की बात करता है।
  • राजनीतिक प्रभाव – भले ही संघ खुद राजनीति से दूर रहने का दावा करता है, लेकिन BJP पर उसका गहरा प्रभाव माना जाता है।
  • गांधी हत्या का आरोप – भले ही कानूनी तौर पर बरी हो गया, लेकिन यह दाग आज भी चर्चा में रहता है।

संघ का पक्ष

संघ हमेशा कहता रहा है कि उसका उद्देश्य केवल राष्ट्र निर्माण और सेवा है, न कि किसी धर्म या राजनीति का पक्ष लेना।


100 साल में RSS की उपलब्धियां

  1. सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन – दुनिया में सबसे ज्यादा स्वयंसेवकों वाला संगठन।
  2. सेवा कार्य – प्राकृतिक आपदा, बाढ़, भूकंप, महामारी में संघ ने हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई।
  3. सामाजिक जागरण – जातिगत भेदभाव कम करने और सामाजिक एकता के लिए काम।
  4. वैश्विक विस्तार – आज संघ की शाखाएं अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया सहित 40 से ज्यादा देशों में सक्रिय हैं।
  5. राजनीतिक प्रभाव – भारतीय राजनीति को नई दिशा देने में परोक्ष भूमिका।

RSS के 100 साल: शताब्दी वर्ष का महत्व

2025 का साल RSS के लिए ऐतिहासिक है क्योंकि यह उसका 100वां वर्ष है।

  • देशभर में विशेष शाखाएं और कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं।
  • सांस्कृतिक यात्रा, संगोष्ठी, सामाजिक सेवा अभियान चल रहे हैं।
  • संघ इस अवसर पर यह संदेश देना चाहता है कि अगले 100 साल भी वह राष्ट्र निर्माण में और सक्रिय रहेगा।

आलोचना और समर्थन: दो पहलू

RSS को लेकर समाज में दो तरह की राय देखने को मिलती है।

समर्थन करने वाले कहते हैं –

  • संघ ने करोड़ों युवाओं का जीवन बदला।
  • यह संगठन भारत की आत्मा और संस्कृति को बचाने वाला है।
  • सेवा और अनुशासन इसका आधार है।

आलोचक कहते हैं –

  • संघ एक धर्म विशेष पर अधिक केंद्रित है।
  • इसकी विचारधारा समाज में विभाजन ला सकती है।
  • राजनीति में इसका प्रभाव लोकतंत्र के लिए चुनौती है।

RSS और आधुनिक भारत

आजादी के 75 साल बाद जब भारत दुनिया की बड़ी ताकत बन रहा है, RSS खुद को इस यात्रा का सहभागी मानता है।

  • नई पीढ़ी में राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक गौरव भरना।
  • तकनीकी युग में भी शाखाओं और सामाजिक कार्यों के जरिए युवाओं को जोड़ना।
  • “वसुधैव कुटुंबकम्” (पूरी दुनिया एक परिवार है) की सोच को बढ़ावा देना।

निष्कर्ष

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने 1925 से लेकर 2025 तक की 100 साल की यात्रा में भारत की राजनीति, समाज और संस्कृति को गहराई से प्रभावित किया है। चाहे सेवा कार्य हों या विवाद, चाहे आलोचना हो या प्रशंसा – संघ ने हमेशा चर्चा में रहना सीखा है।

आज जब RSS अपने शताब्दी वर्ष में खड़ा है, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले दशकों में भी इसका प्रभाव भारतीय समाज और राजनीति में निर्णायक रहेगा। RSS Ke 100 Varsh

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  • RSS उपलब्धियां

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

प्रश्न 1. RSS की स्थापना कब और किसने की थी?
उत्तर: RSS की स्थापना 27 सितंबर 1925 को नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी।

प्रश्न 2. RSS का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: RSS का उद्देश्य भारत को एक सशक्त, संगठित और सांस्कृतिक राष्ट्र के रूप में खड़ा करना है।

प्रश्न 3. RSS की शाखा क्या होती है?
उत्तर: शाखा वह स्थान है जहां स्वयंसेवक प्रतिदिन अनुशासन, योग, व्यायाम, खेल और देशभक्ति से जुड़े कार्यक्रम करते हैं।

प्रश्न 4. RSS पर सबसे बड़ा विवाद कौन सा रहा है?
उत्तर: 1948 में गांधी जी की हत्या के बाद संघ पर प्रतिबंध लगाना उसका सबसे बड़ा विवाद रहा।

प्रश्न 5. RSS का शताब्दी वर्ष कब मनाया जा रहा है?
उत्तर: 2025 में RSS अपने 100 साल पूरे कर रहा है और पूरे देश में शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है। RSS Ke 100 Varsh

A. Kumar

मेरा नाम अजीत कुमार है। मैं एक कंटेंट क्रिएटर और ब्लॉगर हूँ, जिसे लिखने और नई-नई जानकारियाँ शेयर करने का शौक है। इस वेबसाइट पर मैं आपको ताज़ा खबरें, मोटिवेशनल आर्टिकल्स, टेक्नोलॉजी, एजुकेशन, हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी उपयोगी जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराता हूँ।

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