शेयर बाजार राशिफल फैशन बॉलीवुड साउथ सिनेमा पर्व-त्यौहार आरती संग्रह पूजा-पाठ खान-पान टॉप डील्स विदेश ब्यूटी & स्किन हेल्थ आध्यात्मिक सरकारी योजना

---Advertisement---

मोक्षदा एकादशी व्रत कथा: वो पावन कथा जिसने एक राजा को अपने पिता को नरक से मुक्ति दिलाई

On: December 1, 2025 6:06 PM
Follow Us:
Mokshada Ekadashi 2025 Hindi
---Advertisement---

Mokshada Ekadashi 2025 Hindi / मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को “मोक्षदा एकादशी” कहते हैं। नाम ही बता रहा है – “मोक्ष देने वाली एकादशी”। जो इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के साथ सच्चे मन से व्रत करता है, उसका और उसके पूरे कुल का मोक्ष हो जाता है। यह एकादशी गीता जयंती के दिन भी होती है, क्योंकि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया था। आइए, आज बहुत सरल भाषा में इसकी पूरी व्रत कथा, महत्व, पूजा विधि और फल सुनते हैं।

मोक्षदा एकादशी की पौराणिक कथा (ब्रह्मवैवर्त पुराण से)

बहुत पुराने समय की बात है। चंपक नाम का एक सुंदर नगर था। वहाँ वैखानस नाम का एक धर्मात्मा राजा राज्य करता था। प्रजा सुखी थी, खजाना भरा था, लेकिन राजा का मन हमेशा उदास रहता था। वजह थी – राजा को रात में सपने में अपने पिता को नरक में भयंकर यातनाएँ सहते देखना।

एक रात राजा ने फिर वही दर्दनाक सपना देखा। सुबह उठते ही वे रोने लगे और दरबार भी नहीं गए। सारे मंत्री घबरा गए। तभी वहाँ परशुराम जी के शिष्य महर्षि पार्वत पधारे। राजा ने दंडवत करके सारा सपना सुनाया और बोले, “हे मुनीवर! मेरे पिता नरक में क्यों हैं? मैंने तो हमेशा धर्म किया है, फिर मेरे कुल में ऐसा पाप कैसे?”

महर्षि पार्वत ने ध्यान लगाया और बोले, “राजन्! तुम्हारे पिता पूर्वजन्म में बहुत बड़े राजा थे, लेकिन एक बार उन्होंने अपनी रानियों के साथ रासलीला की थी और उसी रात एक गरीब ब्राह्मण की पत्नी भूख-प्यास से तड़पकर मर गई थी। उसका श्राप लगा कि अगले जन्म में तुम्हारे पिता को नरक भोगना पड़ेगा। लेकिन चिंता न करो। मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी का व्रत तुम करो। इस व्रत का पुण्य तुम अपने पिता को दे दो, वे तुरंत नरक से मुक्त हो जाएँगे।”

राजा ने महर्षि से पूरी विधि पूछी और अगली एकादशी को पूरी श्रद्धा से व्रत किया।

उस दिन राजा ने क्या-क्या किया?

  • सूर्योदय से पहले उठे, स्नान किया, स्वच्छ वस्त्र पहने
  • घर में दामोदर (भगवान विष्णु) की मूर्ति स्थापित की
  • तुलसी (आसन) पर बैठकर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप किया
  • दिन भर निराहार रहे, सिर्फ फल-दूध लिया
  • रात को भगवान के सामने दीपक जागरण किया, भजन-कीर्तन हुए
  • अगले दिन द्वादशी को ब्राह्मणों को भोजन कराया, दक्षिणा दी और व्रत का पारण किया

जैसे ही राजा ने व्रत का पुण्य अपने पिता को समर्पित किया, आकाशवाणी हुई – “राजन्! तुम्हारे पुण्य से तुम्हारे पिता नरक से मुक्त होकर वैकुंठ जा रहे हैं।” उसी समय राजा को सपने में अपने पिता दिखे – वे दिव्य वस्त्र, दिव्य विमान में बैठे हुए। पिता ने आशीर्वाद दिया और स्वर्ग चले गए।

राजा की खुशी का ठिकाना न रहा। उस दिन से यह एकादशी “मोक्षदा एकादशी” कहलाने लगी।

दूसरी छोटी कथा – गोदावरी नदी के किनारे का ब्राह्मण

एक दूसरी कथा में लिखा है कि गोदावरी नदी के तट पर एक गरीब ब्राह्मण रहता था। उसकी पत्नी और बच्चे भूखों मर रहे थे। एक दिन वह रोते-रोते भगवान के सामने गया और बोला, “हे दामोदर! मेरे पास कुछ नहीं है, मेरे बच्चे भूख से बिलख रहे हैं।”

भगवान ने प्रत्यक्ष दर्शन दिए और कहा, “मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी का व्रत करो। सिर्फ एक दिन का व्रत भी करोड़ यज्ञों के बराबर पुण्य देगा।”

ब्राह्मण ने व्रत किया। अगले ही दिन राजा के यहाँ से उसके लिए अन्न, वस्त्र और धन का ढेर आ गया। उस दिन से उसका घर सुख-समृद्धि से भर गया। इसीलिए इस एकादशी को “मोक्षदा” के साथ-साथ “धनदा एकादशी” भी कहते हैं।

मोक्षदा एकादशी का महत्व – क्यों है इतनी खास?

  1. यह गीता जयंती का दिन है – इसी दिन भगवद्गीता का अवतरण हुआ था।
  2. इस दिन भगवान दामोदर (विष्णु जी) की पूजा करने से सारे पाप कट जाते हैं।
  3. जो व्यक्ति इस व्रत को करता है, उसके सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।
  4. मरने के बाद उसे वैकुंठ में स्थान मिलता है।
  5. कुल के पितरों को भी मोक्ष मिलता है – इसलिए इसे “पितृ मोक्ष एकादशी” भी कहते हैं।
  6. जो निर्जला नहीं कर सकता, वह फलाहार कर सकता है – फिर भी पूरा फल मिलता है।

2025 में कब है मोक्षदा एकादशी?

इस साल (2025) मोक्षदा एकादशी 11 दिसंबर, गुरुवार को है। व्रत पारण 12 दिसंबर को सुबह 7:05 से 9:15 के बीच करना शुभ रहेगा।

घर में बहुत सरल पूजा विधि

कोई महँगा सामान नहीं चाहिए, बस सच्चा मन चाहिए:

  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
  2. घर के मंदिर में भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण की मूर्ति/फोटो सामने रखें।
  3. पीले या सफेद कपड़े बिछाएँ, तुलसी का पत्ता जरूर चढ़ाएँ।
  4. फल, मिठाई, पंचामृत, तुलसी दल, फूल चढ़ाएँ।
  5. घी का दीपक और धूप जलाएँ।
  6. “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “ॐ दामोदराय नमः” मंत्र का कम से कम 1 माला जाप करें।
  7. गीता का एक अध्याय या “विष्णु सहस्रनाम” पढ़ें।
  8. रात को जागरण करें या कम से कम एक भजन जरूर गाएँ।
  9. अगले दिन ब्राह्मण या गरीब को दान-दक्षिणा देकर व्रत खोलें।

कौन-कौन व्रत कर सकता है?

  • हर उम्र का स्त्री-पुरुष
  • गर्भवती महिलाएँ भी फलाहार करके कर सकती हैं
  • बच्चे भी माता-पिता के साथ छोटा व्रत कर सकते हैं
  • अगर बीमार हैं तो सिर्फ एक समय फल लेकर भी पुण्य मिलता है

आज के समय में भी लोग चमत्कार देख रहे हैं

आज भी लाखों लोग मोक्षदा एकादशी का व्रत करते हैं और कहते हैं:

  • कई लोगों की नौकरी लग गई
  • लंबी बीमारी ठीक हो गई
  • घर में चली आ रही कलह खत्म हो गई
  • जिनके पितरों की अस्थियाँ गंगा में नहीं डाली गई थीं, उन्हें भी शांति मिली

कहते हैं जब आप किसी एकादशी का व्रत सच्चे मन से करते हैं, तो भगवान दामोदर स्वयं आपके घर आते हैं और सारी मनोकामनाएँ पूरी करते हैं।

अंत में एक छोटी प्रार्थना

हे दामोदर! हे गीता के गायक! हे मोक्षदा एकादशी के स्वामी! इस बार हम सबको सच्ची श्रद्धा देना, हमारे पितरों को मुक्ति देना, हमारे पाप काटना और हमें अपना बना लेना।

इस मोक्षदा एकादशी पर बस एक संकल्प लीजिए – “हे प्रभु! इस बार का व्रत मैं अपने माता-पिता और पितरों के लिए करूँगा।”

बस इतना कर लीजिए, भगवान बाकी सब स्वयं कर देंगे।

जय श्रीकृष्ण! जय मोक्षदा एकादशी!!

A. Kumar

मेरा नाम अजीत कुमार है। मैं एक कंटेंट क्रिएटर और ब्लॉगर हूँ, जिसे लिखने और नई-नई जानकारियाँ शेयर करने का शौक है। इस वेबसाइट पर मैं आपको ताज़ा खबरें, मोटिवेशनल आर्टिकल्स, टेक्नोलॉजी, एजुकेशन, हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी उपयोगी जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराता हूँ।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment