Malabar Gold and Diamonds Boycott Ahead of Dhanteras / धनतेरस से पहले केरल के मलाबार गोल्ड एंड डायमंड्स ज्वैलरी ब्रांड के बायकॉट की मांग — ये पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर है वजह
धनतेरस का त्योहार भारत में सोने-चांदी की खरीदारी का सबसे शुभ अवसर माना जाता है। हर साल इस दिन करोड़ों रुपये का सोना बिकता है, और ज्वैलरी ब्रांड्स ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नए-नए ऑफर लाते हैं। लेकिन इस बार एक अलग ही माहौल है। केरल का मशहूर ब्रांड Malabar Gold & Diamonds चर्चा में है, लेकिन वजह उसकी सेल नहीं, बल्कि उस पर उठी बायकॉट की मांग है।
सोशल मीडिया पर #BoycottMalabarGold ट्रेंड कर रहा है। लोग इस ब्रांड से नाराज़ हैं क्योंकि इसका नाम एक पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर के साथ जुड़ गया है जिसने भारत के खिलाफ बयान दिए थे। देखते ही देखते यह मामला इतना तूल पकड़ गया कि अदालत तक जा पहुंचा। आइए समझते हैं पूरा मामला क्या है, क्यों भड़की जनता, और इस विवाद का असर धनतेरस की खरीदारी पर क्या पड़ेगा।
1. मलाबार गोल्ड एंड डायमंड्स का परिचय
मलाबार गोल्ड एंड डायमंड्स की शुरुआत 1993 में केरल के कोझीकोड से हुई थी। यह भारत के सबसे बड़े ज्वैलरी ब्रांड्स में से एक है और 10 से अधिक देशों में इसके 300 से ज्यादा शोरूम हैं। भारत के अलावा दुबई, सिंगापुर, मलेशिया, यूके और अमेरिका में भी इसकी मजबूत मौजूदगी है।
इस ब्रांड के विज्ञापनों में बड़े-बड़े बॉलीवुड सितारे नजर आते हैं — करीना कपूर खान, तमन्ना भाटिया, अनन्या पांडे जैसी अभिनेत्रियाँ इसकी प्रमोशनल कैंपेन का हिस्सा रही हैं।
कंपनी अपने CSR (Corporate Social Responsibility) कार्यों के लिए भी जानी जाती है। शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में इसका निवेश रहा है। लेकिन, बीते कुछ वर्षों में इस ब्रांड के कुछ विज्ञापन विवादों में भी रहे हैं — जैसे “नो बिंदी” वाले ऐड को लेकर सोशल मीडिया पर विरोध हुआ था।
2. विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब सितंबर 2025 में मलाबार गोल्ड ने ब्रिटेन में अपना नया शोरूम लॉन्च किया। इस इवेंट में बॉलीवुड अभिनेत्री करीना कपूर खान को खास अतिथि के रूप में बुलाया गया था।
इसी दौरान एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अलीश्बा खालिद की मौजूदगी चर्चा में आ गई। अलीश्बा एक पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर्सनैलिटी हैं जो ब्यूटी और फैशन कंटेंट के लिए जानी जाती हैं। लेकिन भारतीय यूजर्स ने उनकी कुछ पुरानी पोस्ट्स को शेयर करना शुरू किया, जिनमें उन्होंने पाकिस्तान के समर्थन और भारत की आलोचना में बातें लिखी थीं।
इन पोस्ट्स के वायरल होते ही भारतीय सोशल मीडिया पर आक्रोश फैल गया। लोगों ने सवाल उठाया कि एक भारतीय ब्रांड, जो धनतेरस और दिवाली जैसे त्योहारों पर देश में लाखों ग्राहकों से कमाई करता है, वह भारत विरोधी विचार रखने वाली इन्फ्लुएंसर को प्रमोट कैसे कर सकता है?
3. सोशल मीडिया पर गुस्सा और #BoycottMalabarGold ट्रेंड
जैसे ही यह खबर फैली, ट्विटर (अब एक्स), इंस्टाग्राम और फेसबुक पर #BoycottMalabarGold ट्रेंड करने लगा।
लोगों ने मलाबार गोल्ड के विज्ञापनों के स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा —
“हम ऐसे ब्रांड से खरीदारी क्यों करें जो पाकिस्तान समर्थकों को प्रमोट करता है?”
“देश की भावनाओं से खेलने वालों को सबक सिखाना होगा।”
कई यूजर्स ने यह भी कहा कि जब भारत-पाक तनाव चल रहा है, तब एक भारतीय ब्रांड को ऐसी गलती नहीं करनी चाहिए थी।
धीरे-धीरे मामला इतना बढ़ गया कि लोगों ने दुकानों का बायकॉट करने की अपील कर दी। कुछ जगहों पर स्थानीय व्यापारी संगठनों ने भी बयान जारी किए कि त्योहारों के वक्त भारतीय संस्कृति और संवेदनाओं के खिलाफ कोई भी गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
4. ब्रांड की सफाई और कानूनी कदम
जब विवाद बढ़ने लगा, तो मलाबार गोल्ड ने बयान जारी कर कहा कि उन्होंने किसी भी पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर को ब्रांड एम्बेसडर नहीं बनाया है।
कंपनी के अनुसार, अलीश्बा खालिद केवल यूके लॉन्च इवेंट में मौजूद थीं, और उनके सोशल मीडिया पोस्ट्स का ब्रांड से कोई संबंध नहीं है। कंपनी ने कहा कि जैसे ही उन्हें इस विवाद की जानकारी हुई, उन्होंने उस इन्फ्लुएंसर से जुड़ी सभी गतिविधियाँ तुरंत रोक दीं।
मलाबार गोल्ड ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों और झूठे आरोपों को रोकने के लिए Bombay High Court का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने भी मामले की गंभीरता देखते हुए सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स को आदेश दिया कि वे ऐसे सभी पोस्ट हटाएँ जिनमें मलाबार गोल्ड को “Pakistan sympathiser” या “भारत विरोधी” कहा गया है।
अदालत ने यह भी कहा कि केवल किसी इन्फ्लुएंसर की मौजूदगी के आधार पर किसी कंपनी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
5. जनता की मिली-जुली प्रतिक्रिया
एक ओर जहाँ कुछ लोग ब्रांड के समर्थन में आ गए और बोले कि “बिना पूरे तथ्य जाने किसी कंपनी को बदनाम करना गलत है”, वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों ने यह तर्क दिया कि कंपनियों को अपने सहयोगियों का चयन करते समय सावधानी बरतनी चाहिए।
कई लोगों का मानना था कि सोशल मीडिया पर देशभक्ति के नाम पर चल रहे ट्रेंड्स अक्सर आधे-अधूरे तथ्यों पर आधारित होते हैं। वहीं, कुछ लोगों ने यह भी कहा कि जब किसी व्यक्ति ने खुले तौर पर भारत के खिलाफ बयान दिए हैं, तो उसके साथ किसी भी भारतीय ब्रांड का जुड़ना नैतिक रूप से सही नहीं है।
इस तरह यह विवाद दो हिस्सों में बंट गया —
- एक पक्ष जो बायकॉट की मांग कर रहा था।
- दूसरा पक्ष जो इसे अति-प्रतिक्रिया मान रहा था।
6. अदालत का आदेश — राहत की सांस
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश में कहा कि सोशल मीडिया पर मलाबार गोल्ड के खिलाफ चल रहे पोस्ट और वीडियो भ्रामक हैं और कंपनी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
अदालत ने गूगल, फेसबुक, एक्स (ट्विटर) और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स को 442 ऐसे पोस्ट हटाने के निर्देश दिए जो कंपनी को पाकिस्तान समर्थक या भारत विरोधी दर्शाते थे।
इस आदेश के बाद ब्रांड को थोड़ी राहत मिली और उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी खबर पर विश्वास करने से पहले उसकी सच्चाई जांच लें।
7. क्या ये साजिश थी या वाकई गलती?
अब बड़ा सवाल यही है — क्या यह सब एक संगठित साजिश थी या ब्रांड की तरफ से वाकई में लापरवाही हुई?
कई विशेषज्ञों का कहना है कि यह विवाद “टाइम्ड कैंपेन” जैसा लगता है, क्योंकि यह ठीक उस समय उठा जब धनतेरस और दिवाली जैसे त्योहार आने वाले थे। त्योहारों से पहले किसी बड़े ब्रांड की छवि खराब करना बाज़ार में प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने का तरीका भी हो सकता है।
वहीं, कुछ लोग यह मानते हैं कि चाहे गलती छोटी ही क्यों न हो, ब्रांड को यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि जिनसे वह जुड़ रहा है, उनकी सोच और पृष्ठभूमि भारत के मूल्यों के अनुरूप हो।
सच यह है कि आज सोशल मीडिया के दौर में ब्रांड्स को अत्यधिक सतर्क रहना पड़ता है। एक गलत एसोसिएशन, एक पुराना ट्वीट या एक विवादित फोटो भी करोड़ों रुपये के नुकसान का कारण बन सकता है।
8. धनतेरस पर क्या असर पड़ेगा?
धनतेरस सोने की खरीदारी का सबसे बड़ा दिन होता है। लेकिन इस विवाद ने कुछ लोगों के मन में सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वे इस ब्रांड से खरीदारी करें या नहीं।
हालाँकि मलाबार गोल्ड के शोरूम्स पर ग्राहकों की भीड़ में बहुत बड़ा बदलाव नहीं देखा गया, लेकिन सोशल मीडिया पर नकारात्मक माहौल बना हुआ है।
ब्रांड के कुछ पुराने ग्राहक यह कहते हुए नजर आए कि “हम विश्वास करते हैं कि कंपनी भारत विरोधी नहीं है, लेकिन उम्मीद करते हैं कि भविष्य में ऐसे विवादों से बचा जाए।”
कुल मिलाकर, ब्रांड की बिक्री पर अल्पकालिक असर भले ही सीमित रहे, लेकिन इसकी छवि को जो झटका लगा है, उसे भरने में समय लग सकता है। Malabar Gold and Diamonds Boycott Ahead of Dhanteras
9. ब्रांड के लिए सीख और आगे की रणनीति
यह विवाद कई सबक देता है, खासकर उन कंपनियों को जो बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया मार्केटिंग करती हैं।
- पारदर्शिता और तत्पर प्रतिक्रिया:
जैसे ही विवाद हुआ, मलाबार गोल्ड ने बयान दिया और कानूनी रास्ता अपनाया — यह सही कदम था। भविष्य में ब्रांड्स को और तेज़ प्रतिक्रिया देनी होगी ताकि अफवाहें फैलने का मौका न मिले। - इन्फ्लुएंसर चेकिंग सिस्टम:
किसी भी ब्रांड को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जिन इन्फ्लुएंसर्स के साथ वह काम कर रहा है, उनके सोशल मीडिया इतिहास में कोई विवादास्पद या राष्ट्रविरोधी बयान न हों। - क्राइसिस मैनेजमेंट टीम:
आज के दौर में ब्रांड्स को “ऑनलाइन संकट प्रबंधन टीम” रखनी चाहिए जो तुरंत निगरानी करे कि सोशल मीडिया पर उनके नाम से क्या चल रहा है और कब हस्तक्षेप जरूरी है। - सकारात्मक अभियान शुरू करना:
जब विवाद ठंडा हो, तब ब्रांड को “Made for India” जैसे सकारात्मक अभियानों से अपनी छवि फिर से मजबूत करनी चाहिए। - ग्राहकों से सीधा संवाद:
सोशल मीडिया या प्रेस रिलीज के बजाय वीडियो या लाइव सेशन के माध्यम से ग्राहकों से सीधा बात करना अधिक प्रभावी रहता है।
10. निष्कर्ष
मलाबार गोल्ड एंड डायमंड्स के साथ हुआ यह विवाद दिखाता है कि सोशल मीडिया युग में ब्रांड की साख कितनी नाजुक हो चुकी है। एक इन्फ्लुएंसर की उपस्थिति ने न केवल बहिष्कार की लहर पैदा की बल्कि अदालत को भी हस्तक्षेप करना पड़ा।
धनतेरस जैसे शुभ अवसर पर जब लोग समृद्धि की कामना के साथ सोना खरीदते हैं, तब ऐसी नकारात्मक खबरें निश्चित रूप से बाजार के माहौल को प्रभावित करती हैं।
हालाँकि अदालत ने मलाबार गोल्ड को राहत दी है और झूठे पोस्ट्स हटाने के आदेश दिए हैं, लेकिन ब्रांड की असली परीक्षा अब शुरू होती है — कैसे वह ग्राहकों का भरोसा वापस जीतता है।
भारत जैसे विविधता-पूर्ण देश में व्यवसाय चलाना सिर्फ मुनाफे का खेल नहीं, बल्कि भावनाओं और विश्वास का भी मामला है। और यही विश्वास मलाबार गोल्ड को फिर से हासिल करना होगा। Malabar Gold and Diamonds Boycott Ahead of Dhanteras








