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लालू यादव की कहानी: पान खाकर अफसर के पाउच बैग में थूका

On: September 29, 2025 7:00 PM
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Lalu Yadav Memoir Hindi
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Lalu Yadav Memoir Hindi / सपने में शिव दिखे तो मीट छोड़ा, माफी मांगकर फिर खाने लगे

1990 के दशक की बात है। दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस थी। पत्रकार जुट गए थे। कुर्ता पायजामा पहने एक नेता पत्रकारों के बीच आए और बोले- ‘प्रेस वार्ता तो होइए जाएगा। चलिए पहले पान खा लिया जाए।’ वे पत्रकारों को लेकर पान की गुमटी के पास गए और सबको पान खिलवाया। फिर आकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

कुछ दिन बाद वही नेता फ्लाइट में बैठे थे। उनका प्लेन दिल्ली से बिहार के लिए उड़ने ही वाला था। अचानक उन्होंने अफसर से कहा- सुनो… तुम पान तो खिला दिए।
अब थूकें कहां? बेचारा अफसर हड़बड़ा गया। उसने जल्दी से अपना एक पाउच बैग खाली किया और नेता जी को देते हुए कहा- साहब इसमें थूक दीजिए। नेताजी ने उसी पाउच में थूक दिया…पच्च।

ये वही नेता थे, जो मुख्यमंत्री आवास में अपने बाएं हाथ के अंगूठे को दाईं हथेली में रखकर मलने लगते थे। उसी तरह जैसे तंबाकू या खैनी मलते हैं। ये देखकर अफसर बेहाल होकर तंबाकू खोजने लगता। नेता जी के पीछे हमेशा एक शख्स खड़ा रहता, जो उन्हें हर वक्त मली हुई खैनी देने को तैयार रहता था।

ये नेताजी कोई और नहीं बल्कि बिहार के मुख्यमंत्री रहे लालू यादव हैं, जो पहली बार बीजेपी के समर्थन से सीएम बने और फिर उसी के 10 विधायक तोड़ लिए। Lalu Yadav Memoir Hindi

कहानी लालू प्रसाद यादव की

लालू यादव 5 दशकों से राजनीति में हैं। आज भी वे बिहार और देश की राजनीति में अहम भूमिका निभाते हैं।
11 जून 1948 को गोपालगंज जिले के फुलवरिया गांव में लालू यादव का जन्म हुआ। पिता कुंदन राय ग्वाला थे। उनके पास मुश्किल से 2 बीघा जमीन और कुछ मवेशी थे। लालू 7 भाई-बहनों में छठे नंबर पर थे। उनका परिवार घास-फूस वाली झोपड़ी में रहता था।

लालू दिनभर गाय-भैंस चराते रहते। शाम में मवेशी की पीठ पर बैठकर घर लौटते। लालू यादव अपनी बायोग्राफी ‘गोपालगंज टु रायसीना: माय पॉलिटिकल जर्नी’ में लिखते हैं, ‘हमारा बचपन गरीबी में बीता।
हमारे पास न तो कपड़े थे और न ही चावल, दाल, रोटी और सब्जी वाला पूरा खाना। मां, मकई और मोटे अनाज पानी में उबालकर खाने के लिए देती। पिता गाय-भैंस का दूध ले आते। हम दूध में उबले अनाज को मिलाकर खाते थे।’

सीनियर जर्नलिस्ट संकर्षण ठाकुर अपनी किताब ‘द बिहारी ब्रदर्स’ में लिखते हैं- एक सुबह लालू ईंट के टुकड़े से स्लेट पर कुछ लिख रहे थे।
तभी वहां से गुजर रहे जमींदार ने तंज कसा- देखा हो! ईहे ह कलजुग। अब ई ग्वाला का बच्चा भी पढ़ाई-लिखाई करी। बैरिस्टर बनाबे के बा का…’ लालू के चाचा यदुनंद राय को ये बात चुभ गई। वे पटना के वेटनरी कॉलेज में ग्वाला था। अपने साथ वे लालू को भी पटना लेते आए। यहां लालू के बड़े भाई महावीर और मुकुंद भी रहते थे।

वेटरनरी कॉलेज से सटे बिहार मिलिट्री पुलिस कैम्पस के गवर्नमेंट मिडिल स्कूल में लालू की पढ़ाई शुरू हुई। लालू लिखते हैं- मैंने चोर-सिपाही खेलते-खेलते एक्टिंग सीख ली थी। एक बार स्कूल में शेक्सपीयर के नाटक ‘मर्चेंट ऑफ वेनिस’ की भोजपुरी परफॉर्मेंस हुई। मैंने शायलॉक का रोल किया। मुझे बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला।’

उन दिनों आकाशवाणी का भोजपुरी सीरियल ‘लोहा सिंह’ काफी फेमस था। लालू ने इसके डायलॉग्स याद कर लिए। लोग की फरमाइश पर वे हूबहू लोहा सिंह के डायलॉग सुना देते। ढोलक भी बजाते। लोगों को हंसाने के तरीके ईजाद करते रहते थे।

बाद में लालू का दाखिला शेखपुरा के मिलर हाई स्कूल में हो गया। स्कूल में वे फुटबॉल प्लेयर और एनसीसी कैडेट भी रहे। एनसीसी जॉइन करने के बाद ही लालू ने पहली बार जूते पहने।

यूनिफॉर्म-जूते के लिए राजनीति छोड़ पुलिस जॉइन करना चाहते थे लालू

1965 में उन्होंने 10वीं की परीक्षा पास की। अगले साल उनका दाखिला पटना यूनिवर्सिटी के बिहार नेशनल कॉलेज में हो गया। तब ये कॉलेज छात्र राजनीति का गढ़ था। लालू ने सोशलिस्ट पार्टी जॉइन कर ली। जल्द ही वे सोशलिस्ट लीडर नरेंद्र सिंह के करीबी बन गए।

एक बार सभा के लिए भीड़ जुटानी थी। कॉलेज के गलियारे की रेलिंग पर लालू चढ़ गए। उन्होंने अपना गमछा घुमा-घुमाकर कुछ ही मिनटों में सैकड़ों स्टूडेंट्स इकट्ठा कर लिए।

किताब ‘द बिहारी ब्रदर्स’ में नरेंद्र सिंह बताते हैं- एक बार लालू को एक मीटिंग में आना था, लेकिन वे नहीं पहुंचे। जब मैंने कारण पूछा, तो वे टालते रहे। बाद में उन्होंने कहा कि वे पुलिस की भर्ती में गए थे। वजह पूछी तो कहा- पुलिस की नौकरी मिल जाती, तो फ्री में यूनिफॉर्म और बूट मिल जाता। सैलरी भी मिलती। लेकिन मैं तेज नहीं दौड़ पाया। फेल हो गया। चोट भी लग गई।’

1970 में 22 साल की उम्र में लालू अपने ठेठ गंवई और देसी अंदाज की वजह से पटना विश्वविद्यालय में पॉपुलर हो गए।
नौकरी छोड़ छात्रसंघ चुनाव लड़ा; जेपी आंदोलन से जुड़े, पहली बार में ही सांसद बन गए….

1970 में लालू, पटना यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ का चुनाव जीतकर महासचिव बने। इसी बीच उनका ग्रेजुएशन पूरा हुआ। फिर एलएलबी में एडमिशन ले लिया। इसी दौरान वेटरनरी कॉलेज में उनकी नौकरी लग गई। 1973 में बसंत पंचमी के दिन राबड़ी देवी के साथ लालू की शादी हो गई।

1973 में एक बार फिर से छात्रसंघ के चुनाव हुए। लालू नौकरी छोड़कर लड़े और जीतकर अध्यक्ष बन गए। इसी चुनाव में ABVP के सुशील कुमार मोदी महासचिव और रविशंकर प्रसाद सचिव चुने गए। सुशील मोदी ने एक इंटरव्यू में बताया, कॉलेज के लिए लालू सुबह रिक्शे से निकलते और दोपहर तक पहुंचते। वे रास्ते भर लोगों से मिलते, पान खाते। वो हर चीज में कुछ न कुछ हंसाने वाली बात खोज लेते।

1974 में जेपी आंदोलन शुरू हुआ। लालू भी इससे जुड़ गए। अगले साल उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। करीब 2 साल बाद वे रिहा हुए। इस दौरान उनकी मुलाकात नीतीश कुमार, रामविलास पासवान, शरद यादव जैसे युवा नेताओं से हुई।

1974 में जेपी आंदोलन के दौरान लालू यादव, शरद यादव और रामविलास पासवान तीनों साथी थे। इमरजेंसी के बाद 1977 में लोकसभा चुनाव हुए। आंदोलन से निकली जनता पार्टी चुनाव में उतरी। तब तक लालू पार्टी के टॉप लीडरशिप के चहेते बन गए थे। पूर्व सीएम कर्पूरी ठाकुर ने लालू को छपरा लोकसभा सीट से जनता पार्टी का टिकट दिलवाया दिया। चुनाव में लालू जीत गए और 29 साल की उम्र में पहली बार सांसद बने।

1980 में लालू ने दोबारा छपरा से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। इसके बाद उन्होंने विधानसभा का रुख किया। पहले मई 1980 और फिर मार्च 1985 में सोनपुर सीट से विधायक बने। मार्च 1989 आते-आते वे विपक्ष के नेता भी बन गए। इसी दौरान जनता पार्टी में फूट पड़ गई और यहीं से निकला जनता दल। लालू भी जनता दल में आ गए। नवंबर 1989 में लालू छपरा से चुनाव जीतकर दूसरी बार सांसद बने। Lalu Yadav Memoir Hindi

बीजेपी के समर्थन से पहली बार सीएम बने; फिर बीजेपी के 10 विधायक भी तोड़ लिए

फरवरी 1990, बिहार में विधानसभा चुनाव हुए। 324 में से 122 सीटें जीतकर जनता दल सबसे बड़ी पार्टी बनी। लेकिन बहुमत के लिए चाहिए थी 163 सीटें। तब केंद्र में बीजेपी, जनता दल की सरकार को बीजेपी समर्थन दे रही थी। यही फॉर्मूला बिहार में भी लागू हुआ। बीजेपी के 39, कुछ छोटी पार्टियों और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से जनता दल ने बहुमत का आंकड़ा जुटा लिया।

अब बारी थी मुख्यमंत्री चुनने की। पूर्व सीएम रामसुंदर दास खुद को विधायक दल का नेता मानकर चल रहे थे, लेकिन लालू ने भी दावेदारी ठोक दी। प्रधानमंत्री वीपी सिंह, रामसुंदर के फेवर में थे। उन्होंने तीन पर्यवेक्षक नियुक्त किए- अजीत सिंह, जॉर्ज फर्नांडीस और सुरेंद्र मोहन।

लालू भांप गए कि ये सब राम सुंदर गुट के आदमी हैं। उन्होंने डिप्टी पीएम देवीलाल से बात करके यूपी के सीएम मुलायम सिंह यादव और केंद्रीय मंत्री शरद यादव को भी पर्यवेक्षक दल में शामिल कर लिया।

7 मार्च 1990 की रात लालू ने एक और चाल चली। उन्होंने जनता दल के चंद्रशेखर को फोन किया। कहा- ‘बाबू साहब! हमारी मदद करिए। अगर आपने कुछ नहीं किया, तो वीपी सिंह अपने आदमी को बिहार का मुख्यमंत्री बना देंगे।’

चंद्रशेखर, वीपी सिंह से बेहद खफा थे। उन्हें लगता था कि वीपी सिंह ने चंद्रशेखर को धोखे में रखकर प्रधानमंत्री की कुर्सी पाई थी। लालू ने इसी नाराजगी का फायदा उठाया।

चंद्रशेखर ने फौरन अपने भरोसेमंद और शिवहर से विधायक रघुनाथ झा को फोन घुमाया। कहा कि तुम भी मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारी कर दो।

दूसरी ओर राजपूत नेता जगदानंद सिंह और कुर्मी नेता नीतीश कुमार भी लालू को मुख्यमंत्री बनाने के लिए लामबंदी कर रहे थे।

1990 में लालू यादव को पहली बार सीएम बनवाने में उनके साथी शरद यादव और नीतीश कुमार ने काफी मदद की।
8 मार्च को पटना में जनता दल के विधायकों की मीटिंग हुई। रामसुंदर दास और लालू यादव के अलावा शिवहर के विधायक रघुनाथ झा ने भी विधायक दल के नेता के लिए दावेदारी ठोक दी। चुनाव त्रिकोणीय हो गया। पर्यवेक्षकों ने वोटिंग कराने का फैसला किया।

नतीजे आए तो 12 वोट रघुनाथ झा को, 56 वोट राम सुंदर दास को और 59 वोट लालू यादव को मिले। 42 साल के लालू विधायक दल के नेता चुन लिए गए।

संकर्षण ठाकुर अपनी किताब ‘द बिहारी ब्रदर्स’ में लिखते हैं- लालू की चतुराई से केंद्रीय मंत्री अजीत सिंह तिलमिलाए हुए थे। वे बिहार के राज्यपाल मोहम्मद युनूस सलीम के पास पहुंचे और कहा- लालू के चुनाव पर जब तक दिल्ली की मुहर न लग जाए, तब तक शपथ न दिलवाएं।

यूनुस दुविधा में थे, लालू उन्हें लगातार फोन कर रहे थे। वे अजीत सिंह की बात भी नहीं टाल सकते थे। क्योंकि अजीत सिंह, वीपी सिंह के दूत थे। अजीत के पिता चौधरी चरण सिंह यूनुस के गुरू थे। ऐसे में यूनुस ने दिल्ली की उड़ान भरने का फैसला किया।

जब लालू को पता चला, तो वे यूनुस के पीछे-पीछे एयरपोर्ट के लिए निकल पड़े। रास्तेभर वे ड्राइवर को गाड़ी तेज चलाने को कहते रहे और राज्यपाल को कोसते रहे- ‘इस गवर्नर को राइट और रॉन्ग समझाना पड़ेगा। इसको ड्यूटी बताना पड़ेगा। इलेक्टेड आदमी का ओथ कैसे नहीं करा रहा है?’

लालू एयरपोर्ट पहुंचे, तब तक यूनुस की फ्लाट उड़ चुकी थी। गुस्साए लालू ने घर पहुंचते ही देवीलाल को फोन किया- ‘क्या चौधरी साहेब! आपके राज में ये क्या हो रहा है? हम इलेक्टेड सीएम हैं और अजीत सिंह के कहने पर गवर्नर ओथ से पहले ही भाग गया!’

ये सुनकर देवीलाल भड़क गए। उन्होंने राज्यपाल से बात की और कहा कि वे पटना लौटकर लालू को शपथ दिलवाएं। आखिरकार 10 मार्च 1990 को लालू यादव ने बिहार के 20वें मुख्यमंत्री की शपथ ली। उन्होंने राजभवन में नहीं, बल्कि गांधी मैदान में शपथ ली और गांधी मैदान में शपथ लेने वाले पहले सीएम बने।

10 मार्च 1990 को गांधी मैदान में राज्यपाल मोहम्मद युनूस ने सलीम ने लालू प्रसाद यादव को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई।
जब लालू की मां ने कहा- तहरा के सरकारी नोकरी ना नु मिलल.

मुख्यमंत्री बनने के बाद लालू पहली बार मां मरछिया देवी से मिले। उन्होंने कहा- ‘माई, हम मुख्यमंत्री बन गईनी।’ (मां, मैं मुख्यमंत्री बन गया।)

मां बोलीं- ‘इ का होला?’ (ये क्या होता है?)

लालू बोले- ‘इ जे हथुआ महराज बाड़न न, उनको से बड़का आदमी बन गईल बानी।’ (सारण के राजपरिवार हथुआ महाराज से भी बड़ा पद है।)

लालू की मां बोलीं- ‘अच्छा ठीक बा जाय दे, लेकिन तहरा के सरकारी नौकरी ना नु मिलल।’ (ठीक है, लेकिन तुम्हें सरकारी नौकरी तो नहीं मिली।)

सीनियर जर्नलिस्ट संतोष सिंह अपनी किताब ‘रूल्ड ऑर मिसरूल्ड’ में लिखते हैं, ‘लालू जब भी इस किस्से को सुनाते हैं, तो उनकी हंसी छूट जाती है। 1991 में मां के निधन के बाद लालू ने उनकी एक बड़ी-सी तस्वीर अपने लिविंग रूम में लगाई। वे अक्सर बताते हैं कि मुफलिसी भरे बचपन में उनकी मां दूध के नाम पर उन्हें आटा और पानी का घोल दिया करती थीं।

4 महीने तक प्यून क्वार्टर में रहे, गांव जाते तो लोगों से कहते- खैनी है क्या

मुख्यमंत्री बनने के बाद लालू वेटरनरी कॉलेज के चपरासी क्वार्टर में रहने लगे। ये उनके भाई का क्वार्टर था। संकर्षण ठाकुर अपनी किताब ‘सबआल्टर्न साहेब: बिहार एंड द मेकिंग ऑफ लालू यादव’ में लिखते हैं, लालू गांव की चौपाल की तरह कैबिनेट मीटिंग बुलाते। बड़े-बड़े अफसरों को वेटरनरी कॉलेज की सड़कों पर तलब करते और वहीं से बर्खास्त भी कर देते। शराब की दुकानों पर खुद छापा मारते और उनके लाइसेंस कैंसिल कर देते। बीमार बेटे का इलाज कराने के लिए आम लोगों की तरह पटना मेडिकल कालेज की लाइन में खड़े हो जाते।

लालू काफी अनोखे और गुस्सैल थे। वे हिंदी, भोजपुरी और कुछ अंग्रेजी के शब्दों से मिली अजीब जुबान बोलते थे। अफसर बार-बार उनसे कहते थे कि प्यून क्वार्टर में रहने से कामकाज और सुरक्षा में दिक्कतें पैदा होंगी। लालू हर बार वो एक ही जवाब देते- हम चीफ मिनिस्टर हैं। सब जानते हैं। जैसा हम कहते हैं, वैसा कीजिए।

हालांकि, 4 महीने बाद लालू प्यून क्वार्टर छोड़कर परिवार के साथ 1, अणे मार्ग के मुख्यमंत्री आवास में शिफ्ट हो गए।

4 महीने बाद तक सीएम लालू यादव, पत्नी राबड़ी और बच्चों के साथ वेटरनरी कॉलेज के प्यून क्वार्टर में रहे।
कभी-कभी लालू पटना के फ्रेजर रोड चौराहे पर जाते और खुद हाथ में मेगाफोन लेकर ट्रैफिक संभालने लगते। सरकारी दफ्तरों और पुलिस थानों का औचक दौरा करते और गड़बड़ अधिकारियों को सजा देते। उस वक्त अफसरों के बीच एक कहावत मशहूर थी- ‘न खाता, न बही; जो लालू कहें, सो सही!’

लालू अक्सर बीच खेत में अपना हेलिकॉप्टर उतरवाते और लोगों को उसकी सवारी करवाते। अचानक से अपना काफिला रोककर सड़क किनारे घूम रहे गरीब बच्चों को टॉफी बांटते। गांव जाते तो किसी के घर खाना खा लेते। उनके बच्चों के साथ गाना गाते और मर्दों से पूछते- खैनी है तुम्हारे पास? Lalu Yadav Memoir Hindi

चारा घोटाले में फंसे तो अपनी पार्टी बनाई, पांचवीं पास पत्नी को मुख्यमंत्री बना दिया

अक्टूबर 1990 में लालू ने राम रथ यात्रा के दौरान बीजेपी नेता लाल कृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया। नाराज बीजेपी ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया। अब लालू की सरकार के सामने संकट खड़ा हो गया। पर, लालू ने इसकी तैयारी कर रखी थी। उन्होंने बीजेपी के 10 विधायक तोड़ लिए। लेफ्ट, जेएमएम और कुछ निर्दलीय विधायकों ने भी लालू को समर्थन दे दिया। लालू की सरकार बच गई।

अब तक जनता दल में लालू का कद बढ़ चुका था। 1995 के बिहार चुनाव में भी जनता दल को जीत मिली। लालू फिर से मुख्यमंत्री बने। अगले ही साल वे जनता दल का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बन गए। इसी दौरान 950 करोड़ रुपए का चारा घोटाला उजागर हुआ। इसमें लालू यादव का भी नाम आया। सीबीआई ने जांच शुरू कर दी। उस वक्त इंद्रकुमार गुजराल प्रधानमंत्री थे। लालू का उनको समर्थन भी था, लेकिन कुछ दिन बाद ही उन्होंने सीबीआई से लालू के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की बात कह दी।

लालू ने पीएम गुजराल से कहा, ‘ये सब क्या हो रहा है? एक को हटाकर आपको प्रधानमंत्री बनवाया, आप भी यही सब कर रहे हैं।’

लालू ने शरद यादव, ज्योति बसु और चंद्रबाबू नायडू जैसे नेताओं से बात की। सभी ने कहा कि अगर सीबीआई चार्जशीट दाखिल करती है, तो आपको इस्तीफा देना ही होगा।

23 जून को लालू समेत 55 लोगों के खिलाफ सीबीआई ने चारा घोटाले में चार्जशीट दाखिल की। शरद यादव, और रामविलास पासवान जैसे कदवार नेताओं ने लालू से इस्तीफे की मांग कर दी। इसी बीच जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का चुनाव आ गया। शरद यादव ने लालू को चुनौती दे दी।

1997 में जब चारा घोटाले में सीएम लालू यादव का नाम आ गया, तब उनके इस्तीफे की मांग होने लगी।
5 जुलाई 1997 को लालू यादव ने जनता दल से अलग नई पार्टी ‘राष्ट्रीय जनता दल’ बनाने का ऐलान कर दिया। तब बिहार में जनता दल के 22 में से 16 सांसद लालू के साथ हो गए। इस तरह राष्ट्रीय जनता दल के नाम से नई पार्टी बनी। लालू इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।

सीबीआई की चार्जशीट के बाद लालू की गिरफ्तारी लगभग तय हो गई थी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका लगाई, लेकिन रद्द हो गई। आखिरकार 25 जुलाई 1997 को लालू ने इस्तीफा दे दिया। उसी दिन पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री भी बनवा दिया। इस तरह लालू ने सत्ता और पार्टी की कमान अपने पास ही रखी।

पत्नी को सीएम बनाने के बाद 30 जुलाई, 1997 को लालू यादव ने चारा घोटाला मामले में सरेंडर किया और दिसंबर 1997 तक जेल में रहे। बाद में वे लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य भी बने। 2004 से 2009 तक वे डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार में केंद्रीय रेलमंत्री भी रहे।

बतौर केंद्रीय रेल मंत्री लालू यादव ने भारतीय रेलवे में कई सुधार किए। तब उन्होंने कहा कि रेलवे में 20 हजार करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ, वो भी बिना किराया और माल भाड़ा बढ़ाए। Lalu Yadav Memoir Hindi

जेल से निकलने के बाद बोले लालू- सपने में शिव जी आए थे, अब मैं नॉनवेज नहीं खाऊंगा

लालू के साथी रहे कद्दावर नेता शिवानंद तिवारी एक इंटरव्यू में बताते हैं- खाने के मामले लालू सुपर कुक हैं। कई दफा उन्होंने अपने घर में हमें खाना खिलाया। एक बार वो मुफ्ती मोहम्मद सईद के घर से पालक गोश्त बनाना सीख कर आए थे। उन्होंने हमें फोन कर घर बुलाया और पालक गोश्त खिलाया। वो स्वाद मेरे जेहन में चढ़ गया।’

इंडिया टूडे मैगजीन की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री आवास के तालाब में लालू कई तरह की मछलियां पाला करते थे। वे अपने हेलिकॉप्टर से बिहार के अलग-अलग जगहों से मछलियां लाते थे। एक जमाने में लालू को चूहे खाना भी पसंद था।

सीनियर जर्नलिस्ट कुमकुम चड्ढा एक इंटरव्यू में बताती हैं- एक बार लालू ने बताया था, ‘हम तो चूहा खा कर बड़े हुए हैं। हम चूहे को पकड़ कर उसको जमीन में दे मारते थे। फिर नमक-मिर्च लगा कर आग में भून कर खाते थे।’

1997 में जब लालू चारा घोटाला मामले में जेल से रिहा हुए, तो उन्होंने मांसाहार छोड़ने का ऐलान करते हुए कहा था- भगवान शिव मेरे सपने में आए थे। उन्होंने मुझसे मछली, मटन और नॉनवेज छोड़ने को कहा था। हालांकि 12 साल बाद वे फिर से नॉनवेज खाने लगे और कहा कि मैंने भगवान शिव और सभी देवी-देवताओं से माफी मांगने के बाद ऐसा किया।

2017 में बेनामी संपत्ति और रेलवे घोटाले के कारण लालू यादव और उनका परिवार परेशान था। तब आरजेडी नेता और ज्योतिषी शंकर चरण त्रिपाठी ने लालू की सलाह दी थी कि वे नॉनवेज छोड़ दें। लालू ने नॉनवेज छोड़ दिया, लेकिन मई 2018 में उन्होंने बेटे तेज प्रताप की शादी में मछली खा ली।

12 मई 2018 को लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप और ऐश्वर्या की शादी हुई थी। फिलहाल दोनों के तलाक का मामला अदालत में है। Lalu Yadav Memoir Hindi

चुनाव लड़ने पर रोक लगी तो, छोटे बेटे को राजनीतिक विरासत सौंपी

अक्टूबर 2013 में चारा घोटाला मामले में लालू यादव को पांच साल की सजा सुनाई गई। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत लालू पर सजा के दौरान और उसके बाद 6 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लग गई।

2014 के लोकसभा चुनाव में लालू ने सारण सीट पर अपनी जगह राबड़ी देवी को उतार दिया।
वहीं पाटलीपुत्र लोकसभा सीट पर बेटी मीसा भारती को टिकट दे दिया। हालांकि दोनों चुनाव हार गईं।

अगले साल विधानसभा चुनाव हुए। लालू की आरजेडी और नीतीश की जेडीयू ने साथ मिलकर महागठबंधन बनाया और चुनाव लड़ा। इस बार लालू ने बड़े बेटे तेज प्रताप को महुआ और छोटे बेटे तेजस्वी को राघोपुर सीट से चुनावी मैदान में उतारा। दोनों जीतकर विधायक बने। जब सरकार बनीं तो तेजस्वी डिप्टी सीएम और तेज प्रताप स्वास्थ्य मंत्री बने।

अक्टूबर 2022 में नई दिल्ली में आरजेडी का दो दिवसीय सम्मेलन हुआ। इसमें लालू ने पार्टी की कमान और अपनी राजनीतिक विरासत तेजस्वी को सौंप दी। आज बिहार में तेजस्वी ही आरजेडी का चेहरा हैं और उन्हीं के नेतृत्व में पार्टी चुनाव लड़ती हैं। वहीं दिल्ली में संसद के कामकाज बड़ी बेटी मीसा भारती देखती हैं।

9 अक्टूबर 2022 को आरजेडी सम्मेलन में लालू यादव ने अपनी राजनीतिक विरासत छोटे बेटे तेजस्वी यादव को सौंप दी।
24 मई 2025 को तेज प्रताप के सोशल मीडिया अकाउंट से एक पोस्ट हुआ। जिसमें लिखा गया कि, ‘मैं 12 साल से अनुष्का यादव के साथ रिलेशनशिप में हूं।’ इसमें अनुष्का के साथ तेज प्रताप की कुछ फोटो भी थी। कुछ देर बाद पोस्ट को डिलीट कर दिया गया, लेकिन तस्वीरें वायरल हो गईं।

विवाद बढ़ता देख लालू ने बड़े बेटे तेज प्रताप को पार्टी और परिवार बाहर कर दिया है। अब तेज प्रताप परिवार से दूर अकेले रहते हैं। उन्होंने जनशक्ति जनता दल नाम से नई पार्टी भी बना ली है और महुआ से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। कई मुद्दों पर वे तेजस्वी और आरजेडी का विरोध करते नजर आते हैं। Lalu Yadav Memoir Hindi

A. Kumar

मेरा नाम अजीत कुमार है। मैं एक कंटेंट क्रिएटर और ब्लॉगर हूँ, जिसे लिखने और नई-नई जानकारियाँ शेयर करने का शौक है। इस वेबसाइट पर मैं आपको ताज़ा खबरें, मोटिवेशनल आर्टिकल्स, टेक्नोलॉजी, एजुकेशन, हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी उपयोगी जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराता हूँ।

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