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ICC रैंकिंग कैसे काम करती है? पूरी जानकारी बेहद आसान भाषा में

On: December 10, 2025 6:24 PM
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ICC Ranking kaise kaam karti hai
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ICC Ranking kaise kaam karti hai / क्रिकेट की दुनिया में जब भी किसी टीम या खिलाड़ी की रैंकिंग की बात होती है तो एक नाम सबसे ज्यादा सुनने को मिलता है—ICC Ranking
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ICC रैंकिंग आखिर बनती कैसे है?
किस आधार पर तय होता है कि कौन-सी टीम नंबर 1 है और कौन-सा खिलाड़ी किस पोज़िशन पर?

यह लेख आपको ICC रैंकिंग के काम करने का तरीका बहुत ही आसान, सरल और मानव भाषा में समझाएगा। यहाँ आपको वे सभी बातें मिलेंगी जो एक क्रिकेट फैन को जरूर पता होनी चाहिए।


ICC क्या है और इसकी रैंकिंग क्यों जरूरी है?

ICC यानी International Cricket Council—यह क्रिकेट का ग्लोबल गवर्निंग बॉडी है।
ICC ही तय करता है कि:

  • कौन-सी टीम किस नंबर पर रहेगी
  • किस खिलाड़ी की बैटिंग रैंकिंग क्या होगी
  • कौन बेस्ट गेंदबाज है
  • कौन-सा ऑलराउंडर फॉर्म में है

रैंकिंग के कारण हमें किसी टीम या खिलाड़ी का पर्फॉर्मेंस, स्थिरता और फॉर्म समझने में आसानी होती है।
इससे:

  • टूर्नामेंट में सीडिंग तय होती है
  • टीमें अपने प्रदर्शन का विश्लेषण कर पाती हैं
  • क्रिकेट फैंस को क्लियर आइडिया मिलता है कि कौन सबसे अच्छा है

ICC Ranking कितने प्रकार की होती है?

ICC तीनों फॉर्मेट के लिए अलग-अलग रैंकिंग रखता है:

1. टीम रैंकिंग (Team Rankings)

  • टेस्ट
  • वनडे (ODI)
  • टी20 (T20I)

2. खिलाड़ी रैंकिंग (Player Rankings)

  • बल्लेबाज
  • गेंदबाज
  • ऑलराउंडर

हर फॉर्मेट में खिलाड़ी और टीम की परफॉर्मेंस के आधार पर स्कोर मिलता है, जिसकी मदद से रैंकिंग बनती है।


टीम रैंकिंग कैसे बनती है? (Team Ranking System)

ICC टीम रैंकिंग का फॉर्मूला तीन बातों पर आधारित होता है:

मैच का रिजल्ट (Win, Loss या Tie)

  • जीतने पर ज्यादा पॉइंट
  • टाई या नो रिजल्ट पर कम पॉइंट
  • हारने पर भी कुछ पॉइंट मिलते हैं (खासतौर पर टेस्ट में)

विपक्षी टीम की रैंकिंग और ताकत

अगर आप एक मजबूत टीम को हराते हैं, तो ज्यादा रैंकिंग पॉइंट मिलते हैं।
अगर आप एक कमजोर टीम से हारते हैं, तो ज्यादा पॉइंट कट जाते हैं।

हाल के मैचों को ज्यादा वेटेज (Weightage)

नए मैचों का प्रभाव ज्यादा होता है,
पुराने मैच धीरे-धीरे वेट कम करते जाते हैं।


ICC टीम रैंकिंग कैसे कैल्क्युलेट होती है? (Simple Explanation)

रैंकिंग का मुख्य आधार है Rating Points
इसका फॉर्मूला है:

Rating = (Total Points) ÷ (Matches Played)

मतलब, जितने पॉइंट टीम ने कमाए ÷ जितने मैच खेले
= उतनी टीम की रेटिंग

उदाहरण:
अगर भारत ने 240 पॉइंट कमाए और उसने 20 मैच खेले
तो रेटिंग = 240 ÷ 20 = 120

और यही 120 रेटिंग टीम की पोज़िशन तय करती है।


ODI और T20 रैंकिंग कैसे बनती है?

ODI और T20 रैंकिंग के नियम लगभग समान हैं।

✔ जीत = ज्यादा पॉइंट

✔ टाई/नो रिजल्ट = कुछ पॉइंट

✔ हार = कम पॉइंट

यदि आपने उच्च रैंक वाली टीम को हराया, तो बोनस पॉइंट मिलते हैं।
अगर निचली टीम से हार गए, तो रैंकिंग तेजी से गिरती है।


टेस्ट टीम रैंकिंग कैसे बनती है? (Test Ranking System)

टेस्ट क्रिकेट में रैंकिंग थोड़ा अलग होती है क्योंकि यह लंबा फॉर्मेट है।

टेस्ट रैंकिंग में शामिल होता है:

✔ हर टेस्ट मैच से पॉइंट

✔ हर टेस्ट सीरीज़ से अलग पॉइंट

✔ विपक्ष कितना मजबूत है, इसका खास ध्यान

✔ होम और अवे दोनों को बराबर वेटेज

टेस्ट में एक मैच जीतना ODI/T20 की तुलना में ज्यादा स्कोर देता है।


ICC खिलाड़ी रैंकिंग कैसे काम करती है?

ICC खिलाड़ियों की रैंकिंग तीन कैटेगरी में रखता है:


बल्लेबाज रैंकिंग (Batting Ranking)

बल्लेबाज को हर मैच में 0 से 1000 के स्केल पर पॉइंट मिलते हैं।

इन चीज़ों पर पॉइंट मिलते हैं:

  • कितने रन बनाए
  • किस परिस्थिति में बनाए
  • किस टीम के खिलाफ बनाए
  • मैच में विपक्षी गेंदबाज कितने मजबूत थे
  • रन chase या pressure situation थी या नहीं
  • स्ट्राइक रेट कैसा रहा

उदाहरण:
अगर किसी बल्लेबाज ने कठिन परिस्थिति में शतक लगाया है,
तो उसे ज्यादा पॉइंट मिलते हैं।


गेंदबाज रैंकिंग (Bowling Ranking)

गेंदबाज की रैंकिंग इन बातों पर तय होती है:

  • कितनी विकेट ली
  • किस क्रम के बल्लेबाज को आउट किया
  • मैच का फॉर्मेट
  • पिच और परिस्थितियाँ
  • कितना इकॉनॉमी रहा
  • कितने ओवर गेंदबाजी की

ज्यादा विकेट + कम रन + कठिन परिस्थिति = ज्यादा पॉइंट


ऑलराउंडर रैंकिंग (All-Rounder Ranking)

ऑलराउंडर को बैटिंग और बॉलिंग दोनों के पॉइंट का कॉम्बिनेशन देकर रैंक मिलता है।

जिस खिलाड़ी का संयुक्त स्कोर ज्यादा होता है,
वह टॉप ऑलराउंडर माना जाता है।


ICC रैंकिंग कितने दिनों में अपडेट होती है?

ICC रैंकिंग हर मैच के तुरंत बाद (Dynamic Ranking) अपडेट होती है।
खास टूर्नामेंट के वक्त हर मैच के बाद टीमें ऊपर-नीचे होती रहती हैं।


मैच की क्वालिटी का भी असर पड़ता है

रैंकिंग पॉइंट इस पर भी निर्भर करते हैं कि मैच:

  • द्विपक्षीय सीरीज़ है?
  • ICC टूर्नामेंट है?
  • नॉकआउट है?
  • फाइनल है?

ICC टूर्नामेंट में जीतने पर कुछ ज्यादा पॉइंट मिलते हैं क्योंकि प्रतियोगिता उच्च स्तर की होती है।


पुराने और नए मैचों को अलग वेटेज

ICC खिलाड़ी और टीम रैंकिंग में:

  • पिछले 1 साल के मैच = 100% वेटेज
  • 1–2 साल पुराने = 50% वेटेज
  • 2 साल से अधिक पुराने मैच = हट जाते हैं

इससे सुनिश्चित होता है कि रैंकिंग खिलाड़ी के ताज़ा फॉर्म पर आधारित हो।


उदाहरण से समझें कि रैंकिंग कैसे बदलती है

मान लीजिए भारत की रेटिंग 120 है
और वह नंबर 5 टीम से हार जाता है,
तो उसकी रेटिंग 4–5 पॉइंट गिर सकती है।

लेकिन अगर भारत नंबर 1 टीम को हरा दे,
तो 6–8 पॉइंट तक बढ़ सकते हैं।

इसी तरह खिलाड़ियों की रैंकिंग भी हर अच्छे या खराब प्रदर्शन के बाद बदलती है।


ICC रैंकिंग क्यों जरूरी है?

  • रैंकिंग से पता चलता है कि कौन-सी टीम सबसे मजबूत है
  • ICC टूर्नामेंट में टीमों के ग्रुप तय करने में मदद मिलती है
  • खिलाड़ियों को उनकी निरंतरता का रिवार्ड मिलता है
  • फैंस को परफॉर्मेंस समझने में आसानी
  • खिलाड़ियों को मोटिवेशन मिलता है

ICC रैंकिंग पर विवाद क्यों होता है?

कई फैंस का मानना है कि:

  • छोटे देशों के साथ कम मैच होने से उनके पॉइंट कम रहते हैं
  • कुछ टीमों को ज्यादा सीरीज़ मिलती हैं
  • घरेलू परिस्थितियों में फायदा मिलता है
  • फॉर्मूला जटिल है और आम लोग समझ नहीं पाते

इसलिए अक्सर रैंकिंग पर बहस होती रहती है।


ICC Ranking और Rating में क्या अंतर है?

Rating (रेटिंग)

  • खिलाड़ी या टीम की प्रदर्शन गुणवत्ता का स्कोर
  • यह 0 से 1000 तक होता है

Ranking (रैंकिंग)

  • Rating के आधार पर पोज़िशन (1st, 2nd, 3rd, आदि)

मतलब:
Rating स्कोर है, Ranking पोज़िशन है।


क्या एक मैच से रैंकिंग बहुत बदल जाती है?

आमतौर पर नहीं।
लेकिन अगर:

  • कोई टीम या खिलाड़ी खराब प्रदर्शन करे
  • या कम रैंक वाली टीम से हार जाए

तो रैंकिंग में बड़ा बदलाव हो सकता है।


नंबर 1 टीम या खिलाड़ी कैसे तय होता है?

जिसकी Rating सबसे ज्यादा होती है, वही Rank 1 बन जाता है।
यह रैंकिंग पूरी तरह:

  • पॉइंट
  • प्रदर्शन
  • विपक्ष की ताकत
  • हाल के मैच

पर आधारित होती है। ICC Ranking kaise kaam karti hai


सरल शब्दों में ICC रैंकिंग काम कैसे करती है?

अगर आसान भाषा में समझें:

हर मैच में प्रदर्शन के अनुसार पॉइंट मिलता है →
सभी पॉइंट जोड़कर मैचों से divide किया जाता है →
उससे बनती है Rating →
और Rating के आधार पर तय होती है Ranking

बस!


ICC रैंकिंग के फायदे

  • टीम की प्रगति का स्पष्ट अंदाजा
  • बल्लेबाज और गेंदबाज की स्थिति साफ
  • टूर्नामेंट सीडिंग तय
  • दर्शकों को अपडेटेड जानकारी

ICC रैंकिंग की सीमाएं

  • पुरानी डेटा का प्रभाव
  • होम पिच का फायदा
  • फॉर्मूला थोड़ा जटिल
  • कुछ टीमें कम मैच खेलती हैं

निष्कर्ष: ICC रैंकिंग समझने में आसान है, बस तरीका जानना जरूरी है

ICC रैंकिंग सुनने में भले ही जटिल लगे,
लेकिन इसका सिस्टम बेहद साफ और लॉजिकल है।

यह खिलाड़ियों और टीमों के ताज़ा प्रदर्शन,
विपक्ष की ताकत,
और मैच के महत्व के आधार पर तय की जाती है।

रैंकिंग की वजह से क्रिकेट और भी ज्यादा रोचक बन जाता है,
क्योंकि हर मैच के बाद नए बदलाव देखने को मिलते हैं। ICC Ranking kaise kaam karti hai

A. Kumar

मेरा नाम अजीत कुमार है। मैं एक कंटेंट क्रिएटर और ब्लॉगर हूँ, जिसे लिखने और नई-नई जानकारियाँ शेयर करने का शौक है। इस वेबसाइट पर मैं आपको ताज़ा खबरें, मोटिवेशनल आर्टिकल्स, टेक्नोलॉजी, एजुकेशन, हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी उपयोगी जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराता हूँ।

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