Fed Rate Cut Hindi 2025 / आज रात, 10 दिसंबर 2025 को देर रात के करीब, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल एक ऐसा फैसला सुनाने वाले हैं जो न सिर्फ अमेरिका, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यव्यवस्था को हिला सकता है। कल्पना कीजिए – जब घड़ी आधी रात पार कर रही होगी, न्यूयॉर्क से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू होगी और ब्याज दरों पर बड़ा ऐलान होगा। यह कोई छोटी-मोटी खबर नहीं है। यह साल 2025 की आखिरी FOMC मीटिंग का नतीजा है, जो 9-10 दिसंबर को हुई। दुनिया भर के निवेशक, कारोबारी और आम लोग सांस रोके बैठे हैं। ब्याज दरें घटेंगी या नहीं? अमेरिका को राहत मिलेगी या नई मुश्किलें खड़ी होंगी? और सबसे बड़ा सवाल – भारत जैसे देशों पर इसका क्या असर पड़ेगा?
इस लेख में हम बहुत ही आसान भाषा में सब कुछ समझाएंगे। फेडरल रिजर्व क्या है, जेरोम पॉवेल कौन हैं, यह फैसला क्यों इतना खास है, 2025 में अमेरिका की हालत कैसी चल रही है, संभावित परिणाम क्या हो सकते हैं, दुनिया और भारत पर क्या असर पड़ेगा – सब कुछ विस्तार से। अगर आप शेयर बाजार, लोन, महंगाई या अपनी जेब से जुड़े हैं, तो यह लेख आपके लिए बहुत काम का है। चलिए शुरू करते हैं।
फेडरल रिजर्व: अमेरिका की आर्थिक धड़कन
सबसे पहले बेसिक बात समझ लीजिए। फेडरल रिजर्व (जिसे लोग सिर्फ “फेड” कहते हैं) अमेरिका का सेंट्रल बैंक है। इसे 1913 में बनाया गया था ताकि देश का बैंकिंग सिस्टम कभी न डगमगाए और महंगाई पर काबू रहे। इसका सबसे बड़ा काम है अमेरिकी अर्थव्यवस्था को संतुलन में रखना – न बहुत तेज दौड़े, न रुक जाए।
फेड के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में सात सदस्य होते हैं और उनका लीडर चेयरमैन कहलाता है। अभी जेरोम पॉवेल 2018 से इस पद पर हैं। वे पहले वकील और निवेशक रह चुके हैं और ट्रंप से लेकर बाइडेन तक दोनों के समय काम कर चुके हैं।
FOMC यानी फेडरल ओपन मार्केट कमिटी फेड का सबसे ताकतवर हिस्सा है। इसमें 12 लोग होते हैं। ये लोग साल में आठ बार मिलते हैं और तय करते हैं कि ब्याज दरें बढ़ानी हैं, घटानी हैं या जस की तस रखनी हैं। ब्याज दर का मतलब है – बैंक एक-दूसरे को पैसा उधार देते वक्त कितना ब्याज लेंगे। यह दर बढ़ी तो लोन महंगे, लोग कम खर्च करेंगे, महंगाई घटेगी। यह दर घटी तो लोन सस्ते, खर्च बढ़ेगा, अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलेगी।
2025 में अमेरिका की हालत कैसी है?
इस साल अमेरिका ने बहुत उतार-चढ़ाव देखे। कोविड के बाद की रिकवरी अभी पूरी नहीं हुई थी कि महंगाई ने फिर सिर उठा लिया। जनवरी 2025 में महंगाई करीब 3% के आसपास थी, जबकि फेड का टारगेट सिर्फ 2% है। नौकरियां कम बननी कम हो गईं, बेरोजगारी 4.3% तक पहुंच गई। ऊपर से सरकारी शटडाउन की वजह से कई आर्थिक आंकड़े ही नहीं आ पाए, जिससे फेड को फैसला लेना और मुश्किल हो गया।
GDP ग्रोथ 2% के आसपास अटकी हुई है। ट्रंप प्रशासन ने फेड पर दबाव डाला कि जल्दी से जल्दी दरें घटाओ, लेकिन पॉवेल ने साफ कह दिया – “यह कोई तय बात नहीं है, हम डेटा देखकर चलेंगे।” सितंबर और अक्टूबर में फेड ने 0.25-0.25% की कटौती की थी, जिससे दरें 4% तक आ गईं। अब सबकी नजर दिसंबर पर है – तीसरी कटौती होगी या नहीं?
आज रात क्या होने की उम्मीद है?
ज्यादातर विशेषज्ञों और मार्केट के हिसाब से आज रात 0.25% (25 बेसिस पॉइंट) की कटौती होने की बहुत ज्यादा संभावना है। ऐसा हुआ तो फेड की ब्याज दर 3.50–3.75% के दायरे में आ जाएगी। लेकिन यह फैसला एकदम सर्वसम्मति से नहीं आएगा। फेड के अंदर मतभेद हैं। कुछ सदस्य कह रहे हैं कि महंगाई अभी भी ऊपर है, कटौती नहीं करनी चाहिए। कुछ कह रहे हैं कि नौकरियां बचाना ज्यादा जरूरी है।
अक्टूबर की मीटिंग में ही दो सदस्यों ने विरोध किया था। दिसंबर में तीन तक विरोध हो सकता है – यह छह साल में सबसे ज्यादा असहमति होगी। पॉवेल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में 2026 के लिए संकेत मिलेंगे। शायद वे कहें कि अगले साल कटौतियां बहुत धीमी होंगी या रुक जाएंगी।
दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?
फेड का फैसला सिर्फ अमेरिका तक नहीं रहता। अमेरिकी डॉलर दुनिया की सबसे बड़ी मुद्रा है, इसलिए इसका हर कदम पूरी दुनिया में हलचल मचा देता है।
- अगर दरें घटीं → डॉलर कमजोर होगा → सोना, तेल जैसी चीजें महंगींगी हो सकती हैं → शेयर बाजार में तेजी आएगी।
- अगर दरें नहीं घटीं या सिर्फ थोड़ी घटीं → डॉलर मजबूत होगा → भारत जैसे देशों से पैसा निकल सकता है → शेयर बाजार पर दबाव पड़ेगा।
सितंबर की कटौती के बाद अमेरिकी शेयर बाजार 5% तक चढ़ गया था। अब फिर वैसी ही उम्मीद है। Fed Rate Cut Hindi 2025
भारत पर सीधा असर – अच्छा या बुरा?
हमारी अर्थव्यवस्था अमेरिका से बहुत जुड़ी हुई है।
- अगर फेड ने दरें घटाईं
- रुपया मजबूत हो सकता है (83-84 के आसपास)
- विदेशी निवेशक भारत में फिर पैसा डालेंगे
- NSE-BSE में तेजी आएगी, खासकर IT, फार्मा, बैंकिंग शेयरों में
- होम लोन, कार लोन की EMI थोड़ी कम हो सकती है (अगर RBI भी रेट काटे)
- अगर क्या खतरे हैं?
- अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था बहुत धीमी हुई तो हमारा एक्सपोर्ट (सॉफ्टवेयर, दवा, ज्वेलरी) कम हो सकता है
- अगर फेड में बहुत मतभेद दिखे तो विदेशी निवेशक घबरा सकते हैं और पैसा निकाल सकते हैं
कुल मिलाकर भारत के लिए सकारात्मक असर की उम्मीद ज्यादा है, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है।
पॉवेल के पिछले फैसलों से क्या सीख मिलती है?
पॉवेल को पहले “सख्त” माना जाता था, लेकिन कोविड में उन्होंने दरें जीरो तक कर दी थीं। 2022 में महंगाई 9% पहुंची तो 11 बार दरें बढ़ाईं। अब 2025 में रिवर्स गियर लगा है। उन्होंने बार-बार कहा है – “हम डेटा देखकर फैसला करेंगे, किसी के दबाव में नहीं आएंगे।”
प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या देखना है?
भारत में सुबह करीब 12:30 बजे (11 दिसंबर) पॉवेल प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। इन बातों पर नजर रखें:
- “डॉट प्लॉट” में 2026 के लिए कितनी कटौतियां दिखाई गईं?
- क्या वे कहते हैं कि “अर्थव्यवस्था अच्छी जगह पर है”?
- ट्रंप के नए प्रशासन में उनका पद कब तक रहेगा, इस सवाल का जवाब क्या देते हैं।
अंत में – उम्मीद की किरण या चिंता का बादल?
जेरोम पॉवेल का आज रात का फैसला साल 2025 का आखिरी बड़ा आर्थिक घटनाक्रम है। ज्यादातर विशेषज्ञ 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की उम्मीद कर रहे हैं, जो अर्थव्यवस्था को सहारा देगी। लेकिन फेड के अंदर मतभेद से थोड़ी अनिश्चितता जरूर बढ़ेगी।
भारत के लिए यह ज्यादातर अच्छी खबर है – रुपया मजबूत, शेयर बाजार में तेजी और सस्ते लोन की उम्मीद। बस स्मार्ट रहिए, एकदम से बहुत जोखिम मत लीजिए। अर्थव्यवस्था कोई 100 मीटर की रेस नहीं, मैराथन है। Fed Rate Cut Hindi 2025








