Delhi court notice to Sonia Gandhi / राजनीति में कभी-कभी पुरानी कहानियां नई सिरे से सामने आ जाती हैं, और ये देखकर लगता है जैसे समय रुक-सी गया हो। आजकल सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों पर एक ही नाम छाया हुआ है – सोनिया गांधी। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 9 दिसंबर 2025 को उन्हें नोटिस जारी किया है। वजह? 40 साल पुराना मामला! आरोप है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में न्यू दिल्ली के वोटर लिस्ट में डाला गया, जबकि उन्होंने भारतीय नागरिकता 1983 में ली थी। मतलब, बिना नागरिकता के वोटर बन गईं? ये सुनकर तो हर कोई चौंक गया होगा।
लेकिन रुकिए, ये कोई नई बात नहीं। सोनिया गांधी पर विदेशी मूल के चलते हमेशा से सवाल उठते रहे हैं। आज इस आर्टिकल में हम इस केस की पूरी कहानी सरल शब्दों में समझाएंगे। सोनिया गांधी कौन हैं? ये विवाद कैसे शुरू हुआ? कोर्ट ने क्या कहा? और कांग्रेस की तरफ से क्या जवाब आया? सब कुछ A से Z तक। अगर आप राजनीति में इंटरेस्ट रखते हैं या सोनिया गांधी की जिंदगी की स्टोरी जानना चाहते हैं, तो ये 1500 शब्दों का लेख आपके लिए ही है। चलिए, शुरू करते हैं – बिना किसी भ्रम के, सिर्फ फैक्ट्स के साथ।
सोनिया गांधी: एक इतालवी लड़की से भारत की राजनीतिक रानी तक की जर्नी
सबसे पहले थोड़ा बैकग्राउंड। सोनिया गांधी का जन्म 9 दिसंबर 1946 को इटली के विसेंजोनो शहर में हुआ था। असली नाम एडविगे एंटोनिया अल्बिना माइनो। 1965 में वो भारत आईं, और इंदिरा गांधी के बेटे राजीव गांधी से प्यार हो गया। 1968 में शादी हुई, और सोनिया भारत की बहू बन गईं। राजीव की हत्या 1991 में हो गई, लेकिन सोनिया ने हार नहीं मानी। उन्होंने कभी चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन 1998 से 2017 तक कांग्रेस की प्रेसिडेंट रहीं। आज भी वो राज्यसभा सांसद हैं और पार्टी की चेयरपर्सन।
उनकी जिंदगी हमेशा सुर्खियों में रही। एक तरफ नेहरू-गांधी परिवार की विरासत, दूसरी तरफ विदेशी मूल का विवाद। 1970 के दशक में ही कुछ लोग सवाल उठाने लगे कि क्या वो प्रधानमंत्री बन सकती हैं? संविधान में कोई रोक नहीं, लेकिन नैतिकता का सवाल। 2004 में उन्होंने पीएम पद ठुकरा दिया, मनमोहन सिंह को सौंप दिया। लेकिन ये वोटर लिस्ट वाला मुद्दा? ये तो 1980 का है। आइए, डिटेल में देखें।
वोटर लिस्ट विवाद की शुरुआत: 1980 में क्या हुआ था?
कहानी शुरू होती है जनवरी 1980 से। सोनिया गांधी तब राजीव गांधी की पत्नी थीं, लेकिन भारतीय नागरिकता नहीं ली थी। वो इटली की नागरिक थीं। फिर भी, न्यू दिल्ली लोकसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट में उनका नाम जोड़ दिया गया। यानी, वो वोट डालने की हकदार बन गईं। लेकिन भारतीय कानून कहता है – वोटर बनने के लिए पहले नागरिकता जरूरी है। सोनिया ने नागरिकता 30 अप्रैल 1983 को ली। तो सवाल ये कि नाम कैसे आ गया?
ये आरोप पहली बार 2004 के आसपास जोर-शोर से उठा। कुछ राजनीतिक विरोधी ग्रुप्स ने दावा किया कि दस्तावेजों में जालसाजी हुई। मतलब, फर्जी कागजात बनाकर नाम डाला गया। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड्स में नाम था, लेकिन कोई सबूत नहीं कि उन्होंने 1980 में वोट डाला या नहीं। सोनिया की तरफ से कहा गया – ये गलती चुनाव अधिकारियों की हो सकती है, लेकिन कोई इरादतन धोखा नहीं। फिर भी, ये मुद्दा ठंडा नहीं पड़ा। हर चुनावी मौके पर ये फिर गरम हो जाता।
अब 2025 में ये केस कोर्ट पहुंचा। वकील विकास त्रिपाठी, जो सेंट्रल दिल्ली बार एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट हैं, ने शिकायत की। उन्होंने कहा – ये फॉरजरी का केस है। दस्तावेज फर्जी बने, वरना नाम कैसे आया? पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सितंबर 2025 में उनकी शिकायत खारिज कर दी। कहा – कोई ठोस सबूत नहीं, FIR की जरूरत नहीं। लेकिन त्रिपाठी ने हार नहीं मानी। उन्होंने सेशन कोर्ट में रिवीजन पिटीशन दाखिल की। और 9 दिसंबर को जज विशाल गोगने ने सुनवाई की। Delhi court notice to Sonia Gandhi
कोर्ट ने क्या फैसला दिया? नोटिस का पूरा ड्रामा
राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई हुई। त्रिपाठी के वकील, सीनियर एडवोकेट पवन नारंग ने दलील दी – “दस्तावेज निश्चित रूप से जाली होंगे, क्योंकि बिना नागरिकता के नाम नहीं आ सकता।” उन्होंने चुनाव आयोग से सर्टिफाइड कॉपीज पेश कीं, जो दिखाती हैं कि 1980-81 की वोटर लिस्ट में सोनिया का नाम था। जज ने दोनों पक्षों को सुना। सोनिया की तरफ से अभी कोई जवाब नहीं आया, लेकिन कोर्ट ने नोटिस जारी कर दिया।
नोटिस सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस को भेजा गया। मतलब, पुलिस को भी जवाब देना पड़ेगा कि जांच क्यों नहीं हुई। अगली सुनवाई 6 जनवरी 2026 को। जज ने कहा – ये मामला दोबारा देखने लायक है। अगर फॉरजरी साबित हुई, तो IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी), 465 (जालसाजी) के तहत केस बन सकता है। लेकिन अभी तो सिर्फ नोटिस है, FIR नहीं। कोर्ट ने साफ कहा – सबूतों पर फैसला होगा, अफवाहों पर नहीं।
ये नोटिस जारी होते ही राजनीतिक हंगामा मच गया। BJP की तरफ से चुप्पी, लेकिन सोशल मीडिया पर उनके समर्थक खुश। कांग्रेस ने इसे “राजनीतिक साजिश” बता दिया। लेकिन सवाल ये कि क्या ये केस टिकेगा? या फिर पुरानी स्टोरी की तरह दब जाएगा?
प्रियंका गांधी का तीखा जवाब: “ये झूठ है, सबूत दिखाओ!”
सबसे मजेदार हिस्सा तो प्रियंका गांधी वाड्रा का रिएक्शन। सोनिया की बेटी और कांग्रेस जनरल सेक्रेटरी ने तुरंत कहा – “ये पूरी तरह झूठ है। कोई सबूत है क्या? मां ने नागरिकता लेने के बाद ही वोटिंग शुरू की। वो 80 साल की होने वाली हैं, फिर भी परेशान कर रहे हो। क्यों?” प्रियंका ने कहा – ये BJP की पुरानी ट्रिक है, नेहरू-गांधी परिवार को बदनाम करने की। “मेरी मां ने देश के लिए इतना कुछ किया, अब ये?”
प्रियंका का ये बयान वायरल हो गया। ट्विटर पर #JusticeForSonia ट्रेंड करने लगा। कांग्रेस वर्कर्स ने कहा – ये इलेक्शन कमीशन की एरर थी, सोनिया की गलती नहीं। सोनिया ने खुद कुछ नहीं कहा, लेकिन पार्टी ने प्रेस रिलीज जारी की – “ये पुराना केस है, कोर्ट सब क्लियर कर देगा।”
राजनीतिक कोण: क्या ये चुनावी हथियार है?
दोस्तों, राजनीति में कुछ भी संयोग नहीं होता। 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। कांग्रेस और AAP गठबंधन की बात चल रही है। ऐसे में सोनिया का नाम फिर से घसीटना? कई एनालिस्ट्स कहते हैं – ये BJP की स्ट्रैटेजी है। नेहरू-गांधी परिवार को कमजोर दिखाना। याद कीजिए, 2019 लोकसभा में भी राहुल पर ED केस चला। सोनिया पर नेशनल हेराल्ड केस। लेकिन हर बार कोर्ट ने क्लीन चिट दी या केस कमजोर पड़ा।
कांग्रेस की तरफ से आरोप – “मोदी सरकार संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है।” BJP ने जवाब नहीं दिया, लेकिन उनके एक नेता ने कहा – “कानून सबके लिए बराबर। जांच हो, सच सामने आए।” सवाल ये कि अगर नाम गलती से आया, तो कौन जिम्मेदार? चुनाव अधिकारी या कोई और? ये केस अगर आगे बढ़ा, तो 2024 के लोकसभा चुनावों पर असर पड़ेगा। सोनिया राज्यसभा में हैं, लेकिन पार्टी की रीढ़ हैं। Delhi court notice to Sonia Gandhi
कानूनी पहलू: वोटर लिस्ट में नाम जोड़ना कितना बड़ा अपराध?
अब थोड़ा कानूनी बात। भारत का प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 कहता है – वोटर बनने के लिए 18 साल की उम्र और भारतीय नागरिकता जरूरी। अगर फर्जी तरीके से नाम डाला गया, तो ये चुनाव कानून का उल्लंघन। IPC 1719 (फर्जी वोटिंग) या 420 (चोरी) लग सकता है। लेकिन सजा? 1 से 5 साल जेल। लेकिन साबित करना मुश्किल।
वकील विकास त्रिपाठी ने कहा – “ये पब्लिक डॉक्यूमेंट में फॉरजरी है। मजिस्ट्रेट ने गलती की, अब सेशन कोर्ट सुधारेगा।” दूसरी तरफ, एक्सपर्ट्स कहते हैं – 40 साल बाद सबूत इकट्ठा करना टफ। चुनाव आयोग के पुराने रिकॉर्ड्स में गड़बड़ी हो सकती है। सोनिया की तरफ से दलील आ सकती है – नाम जोड़ा गया, लेकिन वोटिंग नहीं की। तो कोई इरादा नहीं।
सोनिया गांधी के खिलाफ पुराने विवाद: एक नजर
सोनिया पर ये पहला केस नहीं। 1975-77 इमरजेंसी में इंदिरा के खिलाफ केस चले। 2006 में ऑफिस ऑफ प्रॉफिट केस। नेशनल हेराल्ड में ED ने जांच की, लेकिन कुछ नहीं निकला। हर बार वो मजबूत निकलीं। उनकी बायोग्राफी “सोनिया – ए बायोग्राफी” में लिखा है – “वो विदेशी हैं, लेकिन दिल से भारतीय।” राजीव की याद में उन्होंने कभी पैसे नहीं लिए।
सोशल मीडिया पर हंगामा: मीम्स से लेकर बहस तक
9 दिसंबर को नोटिस आते ही ट्विटर धमाल मच गया। #SoniaGandhiNotice ट्रेंड। एक तरफ मीम्स – “सोनिया जी, 80 की उम्र में वोटिंग का रिकॉर्ड?” दूसरी तरफ समर्थक – “ये राजनैतिक उत्पीड़न है।” प्रियंका का वीडियो 10 लाख व्यूज। युवा वोटर्स कह रहे – “पुरानी राजनीति छोड़ो, नए मुद्दे उठाओ।”
आगे क्या? संभावित परिणाम और टिप्स
अगली सुनवाई जनवरी 2026 में। संभव है – कोर्ट FIR का आदेश दे या खारिज कर दे। अगर FIR हुई, तो जांच चलेगी। लेकिन ज्यादातर केस ऐसे दब जाते हैं। सोनिया के लिए ये चैलेंज, लेकिन वो लड़ चुकी हैं। टिप्स: राजनीति में अफवाहों पर न जाएं, फैक्ट्स चेक करें। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपना वोटर आईडी वेरिफाई करें।
निष्कर्ष: सच का इंतजार, राजनीति का खेल
दोस्तों, सोनिया गांधी को दिल्ली कोर्ट का नोटिस एक पुराने घाव को फिर से कुरेदने जैसा है। 1980 का वोटर लिस्ट विवाद आज भी सियासत की रोटियां सेंक रहा। लेकिन याद रखें – कोर्ट फैसला सबूतों पर लेगा, नफरत पर नहीं। सोनिया ने भारत को अपनाया, परिवार को संभाला। प्रियंका का जवाब साफ है – झूठ है। अब जनवरी तक इंतजार। अगर ये लेख पसंद आया, शेयर करें। राजनीति में सच्चाई की जीत हो! Delhi court notice to Sonia Gandhi








